गौरवशाली इतिहास को संजोता… मराठवाडा खादी ग्रामोद्योग समिती…

मराठवाड़ा खादी ग्रामोद्योग समिति यह संस्था स्थापित होने से पहले हैदराबाद खादी समिति में सम्मिलित थी. खादी ग्रामोद्योग आयोग के विकेंद्रीकरण के अनुसार हैदराबाद खादी समिति ने, खादी का काम दिनांक 1 जून 1967 को, मराठवाड़ा खादी ग्रामोद्योग समिति को हस्तांतरित कर दिया.

इसके पहले हैदराबाद खादी समिति के अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी स्वामी रामानंद तीर्थ ने मराठवाड़ा परिसर के सभी खादी कर्मचारियों की सभा बुलाई और मई 1967 में मराठवाड़ा खादी ग्रामोद्योग की स्थापना की गई. इस समय संस्था के पास कोई वर्किंग कैपिटल नहीं था और बहुत सारा बना बनाया, स्टॉक पड़ा हुआ था. बहुत सारे चरखा एवं माग (लूम) पडे हुए थे.

ऐसे में संस्था ने पूरी जमावट करके अपना काम आरंभ कर दिया. प्रथम अध्यक्ष दिगंबरराव बिंदु तथा सचिव(मंत्री) भगवानराव गांजवे को बनाया गया. संस्था के अन्य सदस्य अप्पासाहब सहस्त्रबुद्धे, शंकरराव चव्हाण, दामोदर पांगरेकर, नारायणराव लोहारेकर, गोविंदभाई श्रॉफ तथा देवीसिंह चौहान को मैनेजिंग कमिटी में स्थान दिया गया.

संस्था का मुख्यालय नांदेड रखा गया. 1967 में संस्था के पास चार प्रमुख उत्पादन केंद्र औसा, नांदेड़, अंबाजोगाई तथा उदगीर थे. इनके पास बिक्री की भंडारगृह 14 थी. जो औरंगाबाद, कन्नड़, जालना, बीड, अंबाजोगाई, परभणी, हिंगोली, नांदेड़, देगलूर, उस्मानाबाद, लातूर, उदगीर, औसा और उमरगा को थी. इन भंडारों को सेंट्रल गोडाउन नांदेड से तथा खादी ग्रामोद्योग का माल भिजवाया जाता था.

संस्था को पहले साल 1967 में चार प्रमुख उत्पादन निर्मिती केंद्र से 1,16,722 चौरस मीटर तथा 4,18,178 का खादी उत्पादन किया. जबकि 14 भंडारों से कुल 11,48,153 की बिक्री हुई और इसे पहले साल में रुपये 50,213 का मुनाफा हुआ.

संस्था खादी के साथ-साथ ग्रामोद्योग का भी उत्पादन करती थी. उदगीर में तेल/ऑयल प्रोडक्ट, औसा में और नांदेड़ में हाथ कागज का उत्पादन होता था. इस वर्ष 1967 में ग्रामोद्योग का उत्पादन 54767 रुपए का हुआ.

1967 में मराठवाड़ा खादी ग्राम उद्योग समिति के पास सूत कातनेवाले 724, बुनाई करनेवाले 280, पूर्व प्रोसेस के 70 कारीगर तथा कर्मचारी 52 इस तरह से कुल मिलाकर 925 कर्मचारी कार्यरत थे.

जैसे जैसे साल बीतते गए वैसे वैसे संस्था का काम उत्पादन बढ़ता चला गया. 1990 के बाद परली, पैठण, शिवाजी चौक लातूर, कैलाश नगर नांदेड, लोहा, निलंगा, सेलू, यहां बिक्री के भंडारगृह खुलवाए गए.

और जाने…

आज की स्थिती…