स्फुर्ती स्कीम कि शुरुवात नवंबर-2007 में हुई. उस समय ईस योजना का 5 साल के लिए एक्शन प्लॅन तैयार किया गया. इसके अनुसार KVIC के DSR के अनुसार यह स्किम 110.34 लाख का किया गया. उसके तहत KVIC से 93.80 लाख का तथा संस्था के 15.00 लाख रुपये कुल मिलाकर 108.80 लाख स्टेट बॅंक ऑफ इंडिया नांदेड के स्वामी रामानंद तिर्थ क्लस्टर नाम से अकौंट खुलवाया गया. अब तक 106.17 लाख का विनीयोग किया गया है जो निम्ननूसार है.

  1. Replacement of Charkha & Looms (रु. 49.58 लाख)
    इस योजना के तहत अब तक 8 स्पिंडल के 300 चरखा, 40 लूम्स, 4 वार्पिंग युनिट, अंबर चरखा उत्पादन केद्र, गोंडल, गुजरात से खरीदकर निम्न क्लस्टर में भिजवाए गए है.
    1खादी कार्यालय, उदगीर 50 चरखा 10 लुम्स
    2खादी कार्यालय, औसा175 चरखा 30 लुम्स
    3खादी कार्यालय, कंधार 75 चरखा10 लोकल लुम्स
    4कुल 300 चरखा50 लुम्स

  2. Common Facility Centre (CFC) (रु. 15.00)
    इस योजना में सोलापूर से 3 कांडी मशीन, गोंडल, गुजरात से 4 वार्पिंग युनिट, नांदेड यहां 2 विविंग शेड का पुनर्निमाण यान रिनोवेशन किया गया. और 4 सेंटर में कारीगरों को टॉयलेट एवं बाथरुम का पुनर्निमाण किया गया. औसा के लिए 300Kg का एक बॉयलर खरीदा गया. साथ ही नांदेड में रेडिमेड गारमेंट की 10 सिलाई मशीन खरीदी गई. य़ह सभी युनिट कार्यरत है.
    1कांडी मशीनरु. 1.06 लाख
    2 नांदेड विणाई शेड रु. 2.25 लाख
    3औसा बॉयलररु. 2.88 लाख
    4स्वच्छता गृहरु. 4.00 लाख
    5टेलरिंग मशीन 10रु. 2.10 लाख
    6वारपिंग युनिट 4रु. 2.71 लाख
    7कुलरु. 15.00 लाख


    उपरोक्तनुसार CFC के लिए रु. 15.00 लाख का विनियोग हुआ है. इसके अलावा ISO/BIS प्रमाणपत्र लेने हेतु पूरे डाक्यूमेंट्स BIS कार्यालय को भिजवाया गया. दो फिजिकल ऑडिट के बाद संस्था को BIS/ISO2009:2008 प्रमाणपत्र मिल गया.
  3. Product Development & Design Intervation (रु. 2.43 लाख)
    खादी कपड़ा एवं रेडीमेड कपड़ों पर डिजाइन करने हेतु एक डिजाइनर की नियुक्ति की उन्होंने 14 डिजाइन बुनाई में तथा रेडीमेड शर्ट पर 20 डिजाइन तैयार किए. इसके लिए डिजाइनर कु. पारुल दास को उनकी सैलरी रुपए 1.16 लाख दी गई. इसके अलावा डिजाइन करने हेतु 20 जून को डॉबी बिठाया गया. बुनाई में MKGS का Solvage बनाया गया. कुल खर्चा 2.43 लाख हुआ.
  4. Market Promotional Assistant (MPA) (रु. 15.00 लाख)
    संस्था में जो मेजर बिक्री भंडार है उसे रिनोवेशन करने का प्रावधान था. इसके अनुसार निम्न भंडारों पर रिनोवेशन किया गया.
    1नांदेड़ भंडार का रिनोवेशन के लिएरु. 7:50 लाख
    2लातूर भंडार का रिनोवेशन के लिएरु. 5.00 लाख
    3बीड भंडार का इनोवेशन के लिएरु. 2.00 लाख
    कुलरु. 14.50 लाख

    कुल रु. 14.50 लाख का रिनोवेशन कर दिया गया है जबकि रु. 0.50 लाख कंप्यूटर बारकोडिंग हेतु खर्चा किया गया. सभी बिक्री भवन कार्य बंद होने से कार्यान्वित होने से बिक्री में बढ़ोतरी हो गई.
  5. Capacity Building Measures (CBM) (रु. 7.81 लाख)
    इस योजना में कारीगरों को कताई, बुनाई, धुलाई, रंगाई और कार्यकर्ताओं को मार्केटिंग सेल्समैन की ट्रेनिंग दी गई. कुछ कारीगर और कार्यकर्ताओं को दूसरे संस्थाओं के गतिविधियां देखने हेतु गोंडल, लिंमड़ी, सुरेंद्रनगर (गुजरात), मेटपल्ली, वावीलाल (तेलंगाना) यहां पर एक्स्पोज़र विजिट की गई. इसका सीधा लाभ कुल 685 कारीगरों को हुआ. इसके लिए कुल 7.81 लाख रुपए खर्च किए गए.
  6. Cost of CDE (रु. 4.39 लाख)
    KVIC और संस्था के एक्शन प्लान अनुसार पूर्ति कार्यक्रम पूरा करने में Cluster Development Executive कर बड़ा योगदान रहा है. उस के निर्देशानुसार स्फुर्ति का काम पूरा कर लिया है. इसीलिए CDE का वेतन और मोबाइल का खर्च रु. 4.39 लाख दिया गया.
  7. Cost of T.A. (रु. 2.00 लाख)
    स्फुर्ति कार्यक्रम को हमेशा टेक्निकल एजेंसी से मदद मिलती है. EDI, अहमदाबाद को T.A. के रूप में KVIC ने नियुक्त किया, उसके लिए रु. 2.00 लाख दिए गए.
  8. Cost of I.A. (रु. 7.48 लाख)
    स्फुर्ति कार्य में लगने वाले I.A. प्रतिनिधि का प्रवास खर्च, CDCG मीटिंग खर्च, कंप्यूटर खरीदी, फोन, स्टेशनरी खर्चे के लिए अब तक रु. 7.48 लाख खर्च हुआ है.
    उपरोक्त सभी गतिविधियों के लिए कुल 103.69 लाख का विनियोग करने के पश्चात KVIC के फंड रुपए 87.01 लाख खर्च के बाद, बैलेंस फंड 6.79 लाख KVIC को वापस लौटा दिया गया है.
    सभी कार्यरत कारीगरों को I-Card, स्फुर्ति पासबुक का वितरण किया है, उनको बैठने के लिए आसन तथा मास्क एवं आंखों के लिए पहनने को चश्मा इत्यादि का वितरण किया गया है. सभी चरखा, लूम्स, विणाई शेड, नांदेड़ भवन, बॉयलर का इंश्योरेंस कर दिया है. अब तक कारीगरों का बैंक में 550 अकाउंट खुलवाया है.
    स्र्फुर्ति योजना मार्च-2013 में पूर्ण हो गई. इस योजना से संस्था को बहुत लाभ हुआ. सन् 2000 से 2008 तक संस्था को काफी नुकसान (Loss) पहुंचा. यह योजना के उपरांत अब तक संस्था को मुनाफा(Profit) ही हुआ है. इसलिए यह संस्था KVIC के प्रति आभार व्यक्त करती है.

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कैमेरे कि दृष्टी से खादी ग्रामोद्योग समिती, नांदेड